2029-30 तक 1.5 बिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य

कोयला क्षेत्र में सतत विकास और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की खोज

कोयला खदान और पर्यावरणीय स्थिरता

नई दिल्ली - केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार कोयले की उपलब्धता बढ़ाने और सभी राज्यों के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयला उत्पादक राज्यों के साथ सहयोग कर रही है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने एक दीर्घावधिक उत्पादन रोडमैप तैयार किया और अंतिम रूप प्रदान किया, जिसमें आनुपातिक उठान के साथ 2029-30 तक 1.5 बिलियन टन कोयला उत्पादन की परिकल्पना की गई है। सरकार का लक्ष्य  उत्पादन और उठान में वृद्धि के साथ, विद्युत क्षेत्र की अधिकांश घरेलू मांग को पूरा करना है।

कोयला उत्पादन में 7.5% वृद्धि, उत्पादन प्रोत्साहन के लिए कई कदम

अक्टूबर 2024 में भारत का घरेलू कोयला उत्पादन 84.47 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.5% अधिक है। उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने कोयला ब्लॉकों की नियमित समीक्षा, सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल, वाणिज्यिक खनन की नीलामी और एफडीआई के लिए उदार नीति जैसे कदम उठाए हैं।

प्रमुख पहलें:

कोयला खदानों का शीघ्र संचालन: अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी।
वाणिज्यिक खनन: राजस्व साझाकरण मॉडल और गैसीकरण/द्रवीकरण के लिए छूट।
आधुनिक तकनीक का उपयोग: उच्च क्षमता वाले उपकरण और भूमिगत खदानों की योजना।
रेलवे परियोजनाएं: कोयला ढुलाई में सुधार के लिए 38 महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें से 5 चालू हो चुकी हैं।

वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए रेलवे बजट में कोयला परिवहन की मांग को पूरा करने के लिए 2.65 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

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कोयला लॉजिस्टिक्स योजना: दक्षता और हरित परिवहन पर जोर

सरकार ने कोयला लॉजिस्टिक्स नीति के तहत कोयला परिवहन में दक्षता, लागत में कमी, और हरित पहल को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं।

मुख्य उद्देश्य:

उपलब्धता: रेल, सड़क, जलमार्ग और बंदरगाहों के जरिए बुनियादी ढांचे का विकास।
अनुकूलन: परिवहन लागत में कमी और दक्षता बढ़ाने के लिए मल्टीमॉडल नेटवर्क।
आधुनिकीकरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, और स्मार्ट तकनीकों का उपयोग।
समावेशिता: सभी हितधारकों की जरूरतों को पूरा करना।


प्रमुख पहलें:

फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC): 90% मशीनीकृत कोयला लोडिंग का लक्ष्य।
रेल आधारित परिवहन: लॉजिस्टिक्स लागत में 14% कमी और 21,000 करोड़ रुपये वार्षिक बचत की योजना।
कार्बन उत्सर्जन में कमी: सड़क परिवहन की हिस्सेदारी घटाकर हरित परिवहन बढ़ाना।
2030 तक 1.5 बिलियन टन कोयला उत्पादन और कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के माध्यम से निर्बाध कोयला परिवहन सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।


वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी: 9 खदानों की सफल बिक्री

कोयला मंत्रालय ने 21 जून 2024 को वाणिज्यिक कोयला खनन की 10वीं नीलामी में 9 खदानों की सफलतापूर्वक नीलामी की। इन खदानों में 3,998.73 मिलियन टन भूगर्भीय भंडार और 14.10 एमटीपीए उत्पादन क्षमता शामिल है।

प्रमुख नीलामी परिणाम:

राजस्व: औसतन 17.44% राजस्व साझाकरण।
आर्थिक योगदान: ₹1,446 करोड़ वार्षिक राजस्व और ₹2,115 करोड़ पूंजी निवेश की संभावना।
रोजगार: लगभग 19,063 नए रोजगार अवसर।
वर्ष 2020 से अब तक 113 खदानों की नीलामी हुई है, जिनकी क्षमता 257.60 एमटीपीए है। ये पहल भारत को कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने, ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

 

कोल इंडिया लिमिटेड की 36 नई परियोजनाओं की योजना

कोयला मंत्रालय ने अगले 5 वर्षों में कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) द्वारा 36 नई खदानें, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) द्वारा 7 खदानें, और एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) द्वारा 2 खदानें खोलने की योजना बनाई है।

प्रमुख बिंदु:

-175 ब्लॉकों का आवंटन, जिनमें से 65 खदानों को संचालन की अनुमति।
-वर्तमान में 54 खदानें सक्रिय।
-2024-25 में (अक्टूबर तक) 537.566 मिलियन टन कोयला उत्पादन।
-कोयला खनन परियोजनाओं से रोजगार, सामाजिक-आर्थिक विकास, और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार।
पर्यावरणीय प्रबंधन:
-खनन के प्रभाव को कम करने के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और पर्यावरण प्रबंधन योजना (EMP) लागू। -सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया और मुआवजा नीति का पालन।

उत्पादन योगदान:
-2021-2024 के बीच कोयला उत्पादन में सतत वृद्धि। ओडिशा, छत्तीसगढ़, और झारखंड शीर्ष उत्पादक।

नई परियोजनाएं देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में मददगार साबित होंगी।

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कोयला उद्योग में ईएसजी मानकों का अनुपालन

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि वैश्विक पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) मानक कोयला उद्योग में कार्बन उत्सर्जन घटाने, स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाने, और पर्यावरणीय तथा सामाजिक दायित्वों को सुनिश्चित करने पर जोर देते हैं।

मुख्य बिंदु:

पर्यावरण पहल:

-हरित आवरण बढ़ाना और जल प्रबंधन।
-स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग।
-ई-वाहनों का इस्तेमाल और इको-पार्क का विकास।
-खनन में विस्फोट-मुक्त तकनीक का उपयोग।

सामाजिक पहल:

-निष्पक्ष श्रम प्रथाएं और सामुदायिक जुड़ाव।
-श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को बढ़ावा।
-कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत समुदायों के विकास के कार्य।

शासन पहल:

-संचालन में पारदर्शिता और नैतिक व्यावसायिक प्रचलन।
-व्यावसायिक दायित्व और स्थिरता रिपोर्ट (BRSR) का प्रकाशन।
-शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए बीआरएसआर अनिवार्य।

कार्यान्वयन:
-कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में अपनी वार्षिक रिपोर्ट में BRSR प्रकाशित की।
-आधुनिक प्रौद्योगिकी से कोयला निष्कर्षण और निकासी, कार्बन उत्सर्जन में कमी का प्रयास।
-भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा सूचीबद्ध कंपनियों को ईएसजी अनुपालन अनिवार्य।
-ईएसजी मानकों का अनुपालन न केवल पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है, बल्कि उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

कोयले का सतत उत्पादन सुनिश्चित करने के कदम

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि कोयला मंत्रालय ने देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने और उसे सतत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

मुख्य प्रयास:

नीतिगत सुधार:

एमएमडीआर अधिनियम, 2021: कैप्टिव खदानों को 50% उत्पादन खुले बाजार में बेचने की अनुमति।
एकल विंडो पोर्टल: स्वीकृतियों को शीघ्रता से पूरा करने के लिए।
वाणिज्यिक खनन नीलामी में छूट और प्रोत्साहन।

तकनीकी सुधार:

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL):
-भूमिगत खदानों में उन्नत प्रौद्योगिकी और बड़े पैमाने पर उत्पादन तकनीक का उपयोग।
-हाईवॉल खदानों और ओपनकास्ट खदानों में उच्च क्षमता की मशीनरी का उपयोग।
-सिंगरेनी कोलियरीज (SCCL): नई परियोजनाओं के लिए संरचनात्मक सुविधाएं विकसित करना।

पर्यावरणीय पहल:

-वृक्षारोपण, इको-पार्क का विकास, और खदान जल का सामुदायिक उपयोग।
-कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ तकनीक अपनाने पर जोर।

उन्नत प्रथाएं:

-आधुनिक तकनीकों से मशीनीकृत कोयला निष्कर्षण और परिवहन।
-बंद खदानों को पुनः खोलने और संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर ध्यान।

उद्देश्य:

घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ाना, पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना, और आधुनिक तकनीकों से खनन संचालन को अधिक कुशल और लाभप्रद बनाना।

 

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की खोज और कोयला क्षेत्र में सुधार

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि सरकार कोल बेड मीथेन (CBM) और भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG) जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है।

मुख्य प्रयास:
कोल बेड मीथेन (CBM):

नीति निर्माण: 1997 में CBM नीति लागू; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MOPNG) और कोयला मंत्रालय के बीच समझौता।
ब्लॉक सक्रियता: 15 CBM ब्लॉक सक्रिय, जिनमें 6 उत्पादन, 2 विकास, और 7 अन्वेषण चरण में हैं।

भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG):

-झारखंड के जामताड़ा में पायलट प्रोजेक्ट।
-प्रौद्योगिकी विकास के लिए चरणबद्ध कार्य।


पर्यावरणीय उपाय:

-नई खदानों के लिए पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी।
-वनीकरण, ग्रीन बेल्ट और प्रदूषण नियंत्रण उपाय।
-खदान बंद करने की योजनाओं में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित।

कोयला उत्पादन रोडमैप:

-2029-30 तक 15 बिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य।
-घरेलू मांग पूरी करने के लिए राज्यों के साथ सहयोग।
-सरकार का उद्देश्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ कोयला क्षेत्र का संतुलित विकास करना है।

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2030 तक 1.5 बिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य

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